आरक्षण सिन्धियों के लिए वरदान है – अतुल राजपाल

पिछले तीन साल में हमारे 3 बच्चे सिंधी विषय लेकर IAS बने हैं। हम सिंधी आजादी के बाद अपने अस्तित्व को बचाने के संघर्ष में जुटे रहे और अपनी सारी ऊर्जा आर्थिक रूप से स्वावलंबी होने में लगा दी। हमारे नेताओ ने भी सिन्धियों को राजनीति और प्रशासन में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की जरूरत पर तरजीह नहीं दिया।

अभी भी हमारी 30% जनसंख्या आर्थिक रूप से स्वावलंबी नहीं हो पायी है। हमारा प्रतिनिधित्व प्रसाशन और राजनीति में न के बराबर है।

क्या आज के समय में केवल आर्थिक रूप से स्वावलंबी होना काफी है? क्या हम अन्य समाजों की तरह खुद को सशक्त पाते हैं? क्या अन्य समाजों की तुलना में हमारा आर्थिक शोषण अधिक नहीं होता है? अन्य समाजों और प्रसाशन की नजर में हमारी क्या हैसियत है?

क्या ऊपर दिए गए प्रश्नों के उत्तर हमारा मनोबल बढ़ाते हैं?

आज हमको राजनीति, प्रसाशन और ज्यूडिशियरी में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जरूरत है। इन तीनों में ही केवल मेरिट के आधार पर पहुँच बनाना बहुत कठिन काम है। अगर सरल होता तो इन तीन सालों में ही कम के कम हमारे 10 प्रतिभागीयों ने जरूर सफलता प्राप्त की होती।

हम पहले ही 68 साल पीछे हैं। हम ऐसा क्या कर सकते हैं जिससे हम अधिक संख्या में इन संस्थाओं में अपने प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर सकें।

वह रास्ता है आरक्षण जो की सिन्धियों के लिए भी उपलब्ध है।समाज के हमारे उस वक़्त के प्रतिनिधियों की अज्ञानता की वजह से हमें अपना राज्य नहीं मिला और आज कुछ तथाकथित बुद्धिजीवि आरक्षण का निराधार विरोध करते हैं। उनके विरोध का न कोई मतलब है और न ही कोई प्रभाव। यह एक संवैधानिक व्यवस्था है जिसमें फ़िलहाल किसी बदलाव की कोई संभावना नहीं है। आने वाले कई दशकों तक इसमें बदलाव की कोई सम्भावना नहीं है।

जो परिपक्व समाज हैं वे आरक्षण का लाभ पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं सरकार पर हर संभव दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं और हमारे तथाकथित सिंधी बुद्धिजीवी इसका आधारहीन विरोध कर रहे हैं। कितने प्रतिशत सिंधी सरकारी नौकरी करने की महत्वाकांक्षा रखते हैं? शायद 5% भी नहीं। तो जब न सरकारी नौकरी करनी है और न ही आपके विरोध करने से कुछ फर्क पड़ने वाला है तो फिर क्यों इतना हो हल्ला।

आरक्षण सिन्धियों के लिए वरदान है। इस आरक्षण का लाभ लेकर वे अपनी पिछली 68 सालों की गलतियों को सुधार सकते हैं। उन्हें इस आरक्षण की  जरूरत केवल अपना राजनितिक, प्रसाशनिक और ज्यूडिशियरी में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए चाहिए। और मजे की बात है यह उनको मिला हुआ है। केवल अज्ञानता की वजह अब तक न इसका लाभ न लेने की वजह से सिन्धियों और साथ ही साथ प्रसाशन में भी भ्रम की स्थिति है की सिंधी आरक्षण की श्रेणी में नहीं आते हैं।

अब ये आधारहीन बेमतलब का विरोध बंद होना चाहिये। इसका लाभ उठाकर सिन्धियों को वास्तविक रूप से सशक्त बनाने की मुहीम शुरू होनी चाहिये।

धन्यवाद
अतुल राजपाल
अध्यक्ष
सिंध वेलफेयर सोसाइटी

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