किसको किसकी चिंता करनी चाहिए? क्या सिंधी अपनी चिंता कर रहे हैं?

​किसको किसकी चिंता करनी चाहिए?

हम हिन्दू सिंधी है। हम हिन्दू है इसलिए ही हमें सिंध से सिंध से विस्थापित होना पड़ा। 

लेकिन हमारी पहचान सिंधी की है और हम भारतीय समाज में सिंधी के रूप में जाने जाते हैं। यह सिंधी पहचान हमारी भाषा की वजह से है। हमारी संस्कृति एक विशिष्ट संस्कृति है। 
हमें इस आजाद भारत में अपना जुदा राज्य नहीं मिला। मिलना चाहिये था, यह हमारा संवैधानिक अधिकार था। अपना राज्य न मिलने की वजह से हम पुरे भारत में बिखर गए। 
हमारी भाषा और संस्कृति आज लुप्त होने की कगार पर है। वजह हमारी जड़ें कमजोर हो चुकी हैं। इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि हम अपनी भाषा और संस्कृति के महत्त्व को भूल चुके हैं।
आज हमें अपनी हिन्दू पहचान की ज्यादा चिंता है लेकिन हमे अपनी लुप्त होती सिंधी पहचान की बिलकुल चिंता नही है। 
चुनाव लोकतंत्र का आधार हैं। यह लोकतंत्र का महापर्व है। यह हर व्यक्ति और कौम को अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का मौका देती है। हम सिंधीयों को भी अपना बात कहने का पूरा हक है।
लेकिन सिंधी दिग्भर्मित है। अपनी जड़ों से कटे होने की वजह से वह बिखर चूका है। उसका अपनी वास्तविक पहचान से भी सम्बन्ध कट चूका है। वह बाकी सब कुछ तो है लेकिन सिंधी नहीं है इसलिए चुनाव में दिशाविहीन बर्ताव करता है। 
वह इतना भ्रमित है कि उसे लगता है कि पूरे हिन्दू समाज की जिम्मेदारी उसकी है। उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या लगभग 23 करोड़ है। 23 करोड़ में हिदू करीब 18 करोड़ हैं और इन 18 करोड़ हिंदुओ में सिंधी हिन्दू लगभग 20 लाख हैं।
अब इन 20 लाख सिंधी हिंदुओं को लगता है कि उत्तर प्रदेश के 18 करोड़ हिंदुओ की जिम्मेदारी उनकी है। अब यह बात तार्किकता से परे है कि 18 करोड़ हिंदुओ पर इन 20 लाख सिंधीयों की जिम्मेदारी है या इन 18 करोड़ हिंदुओ पर इन 20 लाख सिंधीयों की जिम्मेदारी है।
सिंधी इतने भ्रमित हैं कि उन्हें लगता है यदि उन्होंने अपनी इस जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभाया तो पूरे हिंदुओ का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। जितने पुरे 18 करोड़ हिदू खुद को असुरक्षित नहीं महसूस करते उससे ज्यादा तो ये 20 लाख सिंधी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
क्या  इन 20 लाख सिंधीयों को अपनी चिंता करने का हक़ नहीं है?
क्या इन 20 लाख सिंधीयों को अपनी चिंता नहीं करनी चाहिये।
क्या पुरे 18 करोड़ हिंदुओ की जिम्मेदारी इन 20 लाख सिंधीयों पर है?
क्या इस देश ने सिंधीयों की चिंता की है?
अगर की है तो भारत की यह प्राचीनतम संस्कृति लुप्त होने की कगार पर क्यों पहुंच चुकी है?
क्या सिंधी अपनी चिंता कर रहे हैं?
सिंधीयों की चिंता कौन कर रहा है?
क्या उनको अपनी चिंता करने की जरूरत है?
किसको किसकी चिंता करनी चाहिए?

Advertisements

5 thoughts on “किसको किसकी चिंता करनी चाहिए? क्या सिंधी अपनी चिंता कर रहे हैं?

  1. Cnvidhani says:

    It is unfortunate that Indian political system is unbalanced and have not been able to unit all and leadership is selfish barring few leaders. Sindhis should continue to fight for justice at the same time upcoming generation should be supported for higher education, we should invest for them in education , to get uprooted our culture and language, let us make Sindhu open university.

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s